Sunday, 4 March 2018

मोदी जी की तारीफ मैं दो शब्द

मोदी जी की तारीफ मैं दो शब्द

1.मुझे सिर्फ 50 दिन दे दो मैं आपको आपके सपनों का भारत दे दूँगा। 2.100 दिन में काला धन भारत ला दूँगा नहीं तो फाँसी दे देना। 3. 1 साल के भीतर -2 राजनीति से अपराधियों की सफाई कर दूँगा। 4. उनको 60 साल दिए हैं, मुझे सिर्फ 60 महीने दे दो। 5. 2015 तक ये कर दूँगा, 2017 तक वो कर दूँगा, नहीं तो लात मार देना, ज़िंदा जला देना। 6. 2019 तक वो भी कर दूँगा। 7. 2022 तक ही ये हो पाएगा, 2023 से पहले वो नहीं होगा। 8. 2025 तक वो हो जाएगा, 2030 से पहले ये नहीं हो सकता। 9. ये 25 साल से पहले नहीं हो सकता। वो 30 साल में ही हो पाएगा। 10. हम अगले 50 साल के लिए सत्ता में आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अजीब सा बयान दिया कि "जो लोग दलाली नहीं ले पा रहे हैं वह रोजगार का हल्ला मचा रहे हैं" यह प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने के नाम पर चुन कर आए देश के प्रधानमंत्री का बयान है। यदि यह सच है तो मई 2014 से पहले नरेंद्र मोदी से अधिक रोजगार पर हल्ला मचाने वाला व्यक्ति कोई नहीं था। इस हिसाब से नरेंद्र मोदी दलाली खाने वाले सबसे बड़े व्यक्ति थे। मतलब समझिए आप, इनसे इनके किए वादों पर कोई सवाल करे तो वह पाकिस्तानी से लेकर दलाल तक इनके द्वारा ही घोषित कर दिया जाएगा। मेक इन इंडिया - फुस्स स्टार्ट अप इंडिया- फुस्स पाकिस्तान थर-थर- फुस्स चीन थर-थर - फुस्स काला धन - फुस्स 15 लाख - फुस्स 2 करोड़ रोजगार- फुस्स स्वच्छ भारत - फुस्स नमामि गंगे - फुस्स बुलेट ट्रेन - फुस्स सड़क निर्माण - फुस्स एक के बदले 10 - फुस्स महिला सुरक्षा - फुस्स विकास बाऊ - फुस्स काशी टू क्योटो - फुस्स 100 स्मार्ट सिटी - फुस्स विदेशी निवेश - फुस्स धारा 370 - फुस्स मंदिर निर्माण - फुस्स फसल का डेढ़ गुना- फुस्स वन रैंक वन पेन्शन - फुस्स लोकपाल - फुस्स मँहगाई में कमी - फुस्स व्यापार - फुस्स कहने का मतलब यह है कि सब कुछ फुस्स , और इनसे सवाल पूछो तो ये पाकिस्तानी और दलाल घोषित कर देंगे। बाकी सब ठीक है, गाय हमारी माता है बछड़ा हमारा सौतेला भाई !

Tuesday, 27 February 2018

रेड लिपस्टिक दिलवा देना

रेखा का शादी के दो साल बाद ही तलाक हो गया था और तबसे वो अपने माता पिता के घर ही रहती थी। उसकी एक बेटी भी है जिसका जनम उसके माँ बाप के घर ही हुआ और उसके जनम के बाद वो कभी ससुराल नहीं गयी न ही कोई ससुरलिया उसकी या उसके बच्चे की खेर खबर लेने आया कभी ।और अंत मे , टूटे हुए सपनो को बटोर कर रेखा फिर से एक नयी जिंदगी जीने लगी।
वो अभी ससुराल के ख़ौफ़नाक मंजर और क्रूर पति के कैफ से बहार निकली ही नहीं थी के उसकी जिंदगी मई राजू यानी राजीव आ गया,। राजीव जराजीव जिसकी एक बीवी थी दो बेटिया थी। लेकिन जाने राजीव को क्या नजर आता था रेखा मै के वो पागलो की तरह उसे प्यार करने लगा  ।रेखा कुछ समझ नहीं पा रही थी के वो क्या करे, क्योंकि राजीव की तो गृहस्ती है और राजीव कभी बी शयद उसे पत्नी होने का पूरा सम्मान समाज मैं नहीं दिला पायेगा। इसीलिये वो राजीव से दूरी रखने लगी।लेकिन राजीव का मैं कुछ सोचने समझने को तैयार नहीं था।
गर रेखा 5 मिनट फ़ोन न थाए तो राजीव की हालात ऐसी होती थी के जैसे शारीर मई से जान निकल जाए। रेखा किसी चीज का नाम तक भी ले ले तो या किसी चीज की जरा  सी तारीफ भर भी कर दे तो राजीव तुरंत वो उसके लिए खरीद लेता tha। वो कहीं भी जाए लेकिन रेखा के लिए कुछ न कुछ जरूर लाता था। अब रेखा को भी लगने लगा क प्यार के आगे रिश्तो अ कोई मोल नही। क्या हुआ गर वो उसके साथ कभी पत्नी ककी तरह रह नहीं पाएगी लेकिन उसके दिल मै तो वो ही रहेगी और रेखा बिना ब्याह एक बंधन मै बांध गयी।
ल अब 5 साल हो गये और रेखा को कुछ अलग सा बदलाव लगने लगा राजीव दिन बा दिन उस से दूर हो रा था, उसकी हर बात को टालता था।
जो इंसान सिर्फ rekha का चेहरा 2 मिनट के लिए देखने को पहले , बिना बताये  200 किलोमीटर दूर का सफ़र तय करता था अब रेखा के बुलाने पर भी नहीं आ पा रहा था उस से मिलने। रेखा ने एक दिन कहा के मुझे लाल लिपस्टिक दिलवा दो। तो राजीव ने कहा के दिलवा दूंगा। इसके baad रेखा ने कितनी बार ही कहा होगा उस से क एक लिपस्टिक दिलवा दो लेकिन राजिव के पास हर बार नया बहाना होता था।
अब तो रोज र रेखा राजीव से लड़ने लगी के के तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम ही नहीं लेकिन धीरे dheere तो लड़ने के लिए भी टाइम नई दे पाना मुश्किल हो गया राजीव को।

रेखा दिन रात बस रोटी रहती थी और फिर इस सदमे से उसकी सेहत भी बिगड़ने लगी । और रेखा को हॉस्पिटल एडमिट होना पड़ा लेकिन राजिव के पास अभी भी वक्त नहीं था के वो रैह को देखने जा पाये।
औरअब रेखा ने खुद को समझाना शुरू किया के वो राजीव के लिए अपनी बेटी से , माँ बाप से मुह नई मोड़ सकती।एक महीने के बाद रैह हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुई तो घर आई। सोचा क अब खुद से खुद के लिए लिपस्टिक लाउबगि। बहुत रंग देखे कुछ पसंद नई आया। बहुत लिपस्टिक देखि 300 से लेकर 1100 wali और फिर सोचा के क्या करुँगी लिपस्टिक लेकर, मुझे कौनसा शोक है इन चीजो का। लेकिन लिपस्टिक की तमन्ना जा ही नहीं रही थी और फिर अपने घर के पास की दूकान से रेखा ने 2 लिपस्टिक ले ली।
वो लिपस्टिक ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी है । 10 दिन से वाही पड़ी है लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें खोलने का भी दिल नई करता।

सोचती हु के वो इंसान जिसकी खुद की 2 बिया हो और वो उन बेटियो पर जान नियोछावर् करता हो, वो कैसे अपनी ही बेटियो की हर कसम भूल जाता है। वो कैसे किसी दूसरे की बेटी को इतनी आसानी से छल लेता है
राजीव बह



Ruchi Sehgal

Thursday, 15 February 2018

Aur kitni zainab




vo panch din maano hazaro saal the
har pal ha kisi ke pas naye sawaal the
par har sawal ka javaab bus la-javab tha
puchta tha har koi, har gali se  tera pataa 
par koi rasta mud kar javab na deta tha
us raat ammi ro ro kar duhai deti rahi
teri kanch ki churiyo ko je bahr dekhti rahi
vo gulabi rang tha tera manpasand
dekhkar teri kitabe dil par chata tha ranj
abba laaye the naya khilona albela
sochte the ke bus abhi aa jayegi tu
bhai kahta raha ke ab aogi to har baat manega teri
jis tofee choclate ke liye ladti thi se jee bhar ke dunga
ab lagne laga tha duayo ka rang bhi feeka
tum aai lekin saanse harkar aai
tum aai magar ansua ka sailaab lekar aai
tum aai magar ik inqulaab lekar aai
tum aai magar maa ka dil cheerkar aai
tum aai magar beharam duniya ka sar jhuka kar aai
tum aai zainab magar jaane ke liye  aai
khuda kare ke zainab ko insaaf mile
bus itna insaaf or yakeen mile
ke dubara koi zainab na bane ab




Friday, 26 January 2018

जब कर्फ्यू मै था एक शहर सिरसा

सिरसा शहर मै कर्फ्यू लग गया।क्योंकि एक साधू एक संत की एक बलात्कार के मामले मैं फैसला आनेवाला था और फैसला का रुख उस संत के खिलाफ दिख रहा था।
उन दिनों एक माँ बिस्तर पर पड़ी हुई बीमारी की गंभीर हालात झेलती हुई दो बेटो के साथ उस अनजान शहर मे जी रही थी। अनजान शहर इसलिए क्योंकि उस शहर मई कोई उसे जाननेवाला नहीं था। वो उस शहर मई 7 8 महीने पहले ही अपन दो बेटो के साथ आई थी। दरसअल उसकी बेटी साथ के शहर मैं ब्याही हुई थी ।और उसने ही अपनी माँ और भाइयो को पहले अपने शहर सिरसा मै बुलाया फिर दोनों भाइयो का जैसे तैसे कुछ काम शुरू करवाकर सिरसा शहर मै किराये का घर दिलवाया।
अब दोनों भाई उस शहर मई अपनी माँ के साथ रहते थे।
इस कहानी मै, जो माँ का पात्र है वो वास्तविक जीवन मै मेरी बहुत नजदीकी रिश्तेदार हैं जो अभी पिछले बरस तक उत्तर प्रदेश के एक शहर मई अपने भरे पुरे ससुरालियों और मायके वालो के बीच रहा करती थी। इस बीच उनके पति को दो बार अधरंग का अटैक आ गया, एक बार कोहनी की, एक बार कंधे की हड्डी टूट गई और एक बार कूल्हे की हड्डी की ऑपरेशन , इस तरह धीरे धीरे दोनों बेटो ने अपनी जमा पूंजी और साथ ही पुश्तैनी जायदाद का अपने हिस्से का टुकड़ा बेचकर उनके इलाज पर लगा दिया। और ऊपर एक शादीशुदा बहन को हर त्यौहार पर कुछ न कुछ देने की रस्म के चलते काफी कर्जे मई दुब गया परिवार।
लेकिन आखिर मै होनी बलवान हुई और एक पिता  ने लंबी बीमारी से जूझते हुए दीवाली से 5 दिन पहले , 2016 मे अपने देह त्याग दी।
अब बस बची केवल माँ, लेकिन कहते है क माँ की छाया इस दुनिया की सबसे बड़ा आसरा और ताकात है । अब दोनों बेटे और माँ सिरसा शहर मै रहते है। लेकिन अचानक एक महीने से माँ की तबियत बहुत ख़राब रहने लग गई। अब माँ पिछले 20 दिन से बिस्तर पर है। उन्हें लगातार दवाई डॉक्टर की जरुरत पड़ती रहती है
लेकिन संत समुदाय के जाने माने संत और करोड़ो लोगो की श्रद्धा के प्रतिक , राम रहीम की कोर्ट मे पेशी होनी थी तो 3 दिन पहले ही शहर मे कर्फ्यू लग गया। अब ये बच्चे न तो काम पर जा प् रहे है और न ही माँ के लिए दवाई लेने जा सकते है क्योंकि पूरा शहर दंगो और आग मे झुलस रहा है।
और माँ बिस्तर पर लेती हुई बेजान से शारीर के साथ सोच रही हैके काश किसी तरह वो उठ जाए और अपने बच्चों को दो रोटी बनाकर दे दे।
पर क्या फरक पड़ता है किसी को एक बीमार इंसान के दर्द तकलीफ से। यदि दूसरे नजर से देखे तो इन श्रद्धालुओं और दंगाईयो मै कोई ख़ास फरक भी नहो, दोनों केवल खुद की झूठी आन बाण और जिद्द के लिए शांति प्यार सद्भाव सब खत्म कर रे है
लेकिन काश किसी को जरा सा भी ये कहानी छू जाए तो जान जाए के इंसानियत इस धरती पर सबसे बड़ा धर्म है और जीवन का वास्तविक लक्ष्य भी।



Ruchi Sehgal


Saturday, 30 September 2017

प्रदयमन ठाकुर, माँ मैं डरा नहीं

माँ, मै डरा नहीं
था मै बहादुर बेटा
इस बार रोया भी नहीं

मेरे हर आंसू पे तूने संभाला
कहा के बहादुर बच्चे रोते नहीं
देख लो ना, मै रोया नहीं


मै खुद ही खुद को संभालता रहा
रेंगते हुए जिंदगी की और दौड़ता रहा
लेकिन ये रेस मै हार गया

मैं  खून से लहूलुहान था जमीन पर पड़ा
लेकिन तूने कहा था रोना नहीं
देख लो, माँ मै रोया नहीं

Saturday, 16 September 2017

देश का सबसे संवेदनहीन प्रधानमंत्री

"सौगंध मुझे इस मिटटी की,
मै देश नहीं बिकने दूंगा"

" अच्छे दिन आने वाले है"

मोदी जी, आप वो प्रधानमंत्री है, जिसे इस देश की जनता ने  प्यार और गौरव इ साथ देश की कुर्सी पर बिठाया।
आप वो प्रधानमंत्री है जो पिछलेदो दशकों केबाद पहली बार सम्पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता मैं आये।
आप वो प्रधान मंत्री है जिसे देश के लोगो ने आम जनता का प्रधानमंत्री माना था।
आप वो प्रधान मंत्री यही जो 90 दिनों मई देश का काला धन देश मै  लाने वाले थे।

पर  मुझे बेहद्द अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है के आप इस देश के सब से सवेंदन हीन  साबित हुए।
देश मै बिहार झारखण्ड जहा नक्सलवाद पूरी तरह से आतंकवाद का रूप ले चूका है आप उस देश के प्रधान मंत्री है।
हरियाणा प्रदेश मै जाट आरक्षण के नाम पर सेकड़ो महिलाओं से बलात्कार हो जाता है और  बलात्कारी के लिए  की जान चली जाती है परन्तु उसके बाद भी प्रदेश की जनता के लिए एक सहानुभूति भरा शब्द नहीं निकल पता आपके मुँह से।

गुरग्राम मै  के बच्चे की स्कूल के भीतर दिन डिहरे हत्या हो जाती है। पुरे देश के माता पिता चाहे वो कोई आम जनता थी या कोई अभिनेता अपने बच्चो की सुरक्षा के लिए भयभीत हो जाते है। परन्तु आप उस वक्त अहमदाबाद शहर को दुल्हन की तरह सजा रहे थे अपने जापानी दोस्त के लिए।

 देश की ट्रैन का जहा बुरा हाल है , शायद ही कोई ट्रैन पूरी तरह से समय बढ़ता के साथ चलती हो।  4 महीने बाद की एडवांस बुकिंग की डेट भी जहा कन्फर्म नहीं हो पाती वहा बुलेट ट्रैन की निजी खवाइश के लिए देश का पैसा बर्बाद किया जा रहा है

एक 12th पास महिला को देश की शिक्षा मंत्री बनाया जा रहा है।  वह भी उस महिला को जिसे राजनीती का कोई तजरुबा नहीं और जो न कही से संसद है न  प्रतिनिधि।

मोदी जी आप को लालू प्रसाद की बेटी  जाने की फुर्सत तो है , सुरेश रैना जो की एक क्रिकेटर है उसकी शादी मै  भी जाने की फुर्सत है परन्तु क्या आपको दंगा प्रभावित क्षेत्र मई जाना जरुरी नहीं लगा ? पंचकूला , मुजाफर नगर, सहारनपुर क्या जहा लोगो ने अपनी जान साम्प्रदायिकता मै गवा दी क्या वहा आपका जाना जरुरी नहीं था।
देश की बेटिया पहले से अधिक असुरक्षित है , रेलगाड़ी का खाना  150 रुपये मई भी घटिया से घिटया होता जा रा है , टूटी हुयी सड़को की वजह से रोज सेकड़ो हादसे हो जाते है।  धर्मगुरु जो 700 एकड़ से 1200 एकड़ मै खुलेआम अपनी अयाशी की अड्डे चला रहे है
मै  जानना चाहती हु की इतनी बड़ी जगह इन ट्रस्टों के नाम कर दी जाती है और उस जगह पर कोई भी सरकारी पुलिस स्टेशन नहीं।  सरकार  को इतना भरोसा क्यों है इन डेरो पर ? क्युकी यह एक सस्ता और आसान वोट बैंक है।
मै जानती हु के आपके पास कोई जवाब नहीं होगा और न  सवालो  जवाब देंगे हलाकि जनता के सेवक होने के नाते ये आपकी जिम्मेदारी है के आप मेरे सवालों का जवाब दे  मै  फिर भी आपसे ये सवाल करती रहूंगी क्युकी ये मेरा फर्ज और हक़ है चाहे आप आप इन सवालों का जवाब न देकर अपना फर्ज भूल जाए लेकिन मई अपना फर्ज नहीं भूलूंगी। 

Friday, 15 September 2017

प्रदयमन ठाकुर, माँ मैं डरा नहीं

माँ, मै डरा नहीं
था मै बहादुर बेटा
इस बार रोया भी नहीं

मेरे हर आंसू पे तूने संभाला
कहा के बहादुर बच्चे रोते नहीं
देख लो ना, मै रोया नहीं


मै खुद ही खुद को संभालता रहा
रेंगते हुए जिंदगी की और दौड़ता रहा
लेकिन ये रेस मै हार गया

मई खून से लहूलुहान था जमीन पर पड़ा
लेकिन तूने कहा था रोना नहीं
देख लो, माँ मै रोया नहीं


मोदी जी की तारीफ मैं दो शब्द

मोदी जी की तारीफ मैं दो शब्द 1.मुझे सिर्फ 50 दिन दे दो मैं आपको आपके सपनों का भारत दे दूँगा। 2.100 दिन में काला धन भारत ला दूँगा नहीं त...