Saturday, 30 September 2017

प्रदयमन ठाकुर, माँ मैं डरा नहीं

माँ, मै डरा नहीं
था मै बहादुर बेटा
इस बार रोया भी नहीं

मेरे हर आंसू पे तूने संभाला
कहा के बहादुर बच्चे रोते नहीं
देख लो ना, मै रोया नहीं


मै खुद ही खुद को संभालता रहा
रेंगते हुए जिंदगी की और दौड़ता रहा
लेकिन ये रेस मै हार गया

मैं  खून से लहूलुहान था जमीन पर पड़ा
लेकिन तूने कहा था रोना नहीं
देख लो, माँ मै रोया नहीं

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